Thursday, September 13, 2018

जद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि समूची मोदी सरकार घोटालेबाजों

गे उन्होंने कहा, "अगर बच्चे प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यता के बारे में पूछेंगे, तो आप उन्हें क्या बताएंगे...? लोगों को उनकी शैक्षिक योग्यता के बारे में नहीं पता... कौन-सी ताकतें हैं, जो दिल्ली विश्वविद्यालय को उनकी डिग्री जारी करने से रोक रही हैं, जबकि दावा किया जाता है कि वह वहीं पढ़े हैं..."

हालांकि, संजय निरूपम के बयान पर भाजपा नेताओं ने कड़ा विरोध जताया. भाजपा की महाराष्ट्र इकाई की प्रवक्ता शाइना एनसी ने निरुपम को ‘‘मानसिक तौर पर विक्षिप्त’’ करार दिया.
इससे पहले भी संजय निरूपम अपने बयान को लेकर विवादों में फंस चुके हैं. संयज निरुपम ने एक बार कहा था कि , ' देश में वफादारी का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है वजुभाई वाला जी ने. शायद हिंदुस्तान का हर आदमी अपने कुत्ते का नाम वजुभाई वाला ही रखेगा, क्योंकि इससे ज्यादा वफादार तो कोई हो ही नहीं सकता. ' हालांकि, उनके इस बयान पर भी काफी बवाल हुआ था.  नई दिल्ली: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बुधवार को तत्काल प्रभाव से मानव उपयोग के उद्देश्य से 328 एफडीसी (फिक्स्ड डोज कांबिनेशन या निश्चित खुराक संयोजन) के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार ने जिन दवाओंइससे पहले केंद्र सरकार ने 2016 के मार्च में औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, की धारा 26ए के तहत मानव उपयोग के उद्देश्य से 344 एफडीसी के उत्पादन, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया था.इसके बाद सरकार ने समान प्रावधानों के तहत 344 एफडीसी के अलावा पांच और एफडीसी को प्रतिबंधित कर दिया था. हालांकि, इससे प्रभावित उत्पादकों अथवा निर्माताओं ने देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में इस निर्णय को चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 दिसम्बर, 2017 को सुनाए गए फैसले में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए इस मसले पर दवा 

तकनीकी सलाहकार बोर्ड द्वारा गौर किया गया, जिसका गठन औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 5 के तहत हुआ था. इस बोर्ड ने इन दवाओं पर अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंप दी.दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड ने अन्य बातों के अलावा यह सिफारिश भी की कि 328 एफडीसी में निहित सामग्री का कोई चिकित्सीय औचित्य नहीं है और इन एफडीसी से मानव स्वास्थ्य को खतरा पहुंच सकता है.बोर्ड ने सिफारिश की कि औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत व्यापक जनहित में इन एफडीसी के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है. सरकार ने जिन दवाओं पर रोक लगाई है, उनमें सेरिडॉन, डिकोल्ड, जिंटाप, सुमो, जीरोडॉल, फेंसिडील, विक्स एक्शन 500, कोरेक्स और कई तरह के ऐंटीबायॉटिक्स, पेन किलर्स, शुगर और दिल के रोगों की दवाएं शामिल हैं. अभी और भी कई एफडीसी दवाएं हैं, जो देश में बिक रही हैं. माना जा रहा है कि सरकार 500 और एफडीसी पर रोक लगा सकती है. पर रोक लगाई है उनमें वो दवाएं हैं जो लोग जल्‍द आराम पाने के लिए मेडिकल शॉप से बिना पर्चे के खरीद लेते हैं. इसमें कई दवाएं सिरदर्द, जुकाम, दस्त, पेट दर्द जैसी बीमारी में ली जाती हैं. इसके अलावा मंत्रालय ने कुछ शर्तो के साथ छह एफडीसी के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण को भी प्रतिबंधित कर दिया है.
 
नई दिल्ली: भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या द्वारा भारत छोड़ने से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से अपनी मुलाकात का दावा करने के बाद विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया. हालांकि, जेटली ने माल्या के बयान को ‘तथ्यात्मक तौर पर गलत’ करार दिया. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माल्या के ‘अत्यंत गंभीर आरोपों’ की स्वतंत्र जांच के आदेश तुरंत देने चाहिए और जेटली को जांच जारी रहने के दौरान अपना पद छोड़ देना चाहिए. वहीं इस बीच कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया ने कहा है कि उन्‍होंने वित्‍त मंत्री अरुण जेटली और विजय माल्‍या को संसद के सेंट्रल हॉल में एक-दूसरे से बातचीत करते हुए देखा था. उन्‍होंने कहा कि यह बात उस दिन की सी

सीटीवी फुटेज देखने के बाद साबित हो सकती है.
वहीं बीजेपी के पूर्व नेता एवं पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि न सिर्फ वित्त मंत्री जेटली बल्कि पूरे भाजपा नेतृत्व को माल्या से अपने संबंधों पर बेदाग सामने आना चाहिए. कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘माल्या ने दो चीजें कही हैं.पहली कि उसने वित्त मंत्री से व्यवस्थित ढंग से मुलाकात की थी और दूसरी यह कि उसने मामले को सुलझाने की पेशकश की थी.इस मामले का पूरा खुलासा होना चाहिए.व्यापक स्पष्टीकरण आना चाहिए और व्यापक जांच होनी चाहिए.’ उन्होंने सवाल किया, ‘जब बैंकों को मालूम था, वित्त मंत्रालय को मालूम था, पूरी सरकार को मालूम था और माननीय प्रधानमंत्री को मालूम था कि माल्या पर इतना बड़ा कर्ज बकाया है.ऐसे में उसे देश से बाहर क्यों जाने दिया गया.यह बुनियादी सवाल है जिसका उत्तर पूरा देश जानना चाहता है.’
माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि माल्या के भारत से भागने के वाकये ने एक बार फिर इस बात की पुष्टि कर दी कि मोदी सरकार ‘बड़े डिफॉल्टरों को जनता के पैसे लूट कर भागने देती है.असल मुद्दा यह है कि लुकआउट नोटिसों के बाद भी वह कैसे भाग गया?’ आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने माल्या की ओर से किए गए खुलासे को ‘बिल्कुल चौंकाने वाला’ करार दिया और सवाल किया, ‘वित्त मंत्री ने अब तक इस सूचना को छुपाए क्यों रखा?’ केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीरव मोदी के देश छोड़कर जाने से पहले उससे मिलते हैं.विजय माल्या के देश छोड़कर जाने से पहले वित्त मंत्री उससे मिलते हैं.इन बैठकों में क्या पकाया जा रहा था? जनता यह जानना चाहती है.'

Monday, September 10, 2018

के बाद से मोदी दो बार श्रीलंका जा चुके हैं.

रीलंका ने अपना हम्बनटोटा पोर्ट चीन को सौंप दिया. हालांकि ज़्यादातर चीनी प्रोजेक्ट महिंदा राजपक्षे के काल में ही शुरू हुए थे. राजपक्षे की पार्टी श्रीलंका में अब भी लोकप्रिय है. हाल ही में राजपक्षे की पार्टी को स्थानीय चुनावों में जीत मिली है.
2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी दो बार श्रीलंका जा चुके हैं. जब हम्बनटोटा पोर्ट को श्रीलंका ने चीन को सौंपा तो मोदी सरकार की आलोचना हुई थी कि वो श्रीलंका में चीन के प्रभाव को रोकने में नाकाम रही.
नेपाल के साथ भी मोदी के चार साल के शासनकाल में संबंध ख़राब हुए हैं. 2015 में भारत की अनौपचारिक नाकेबंदी के कारण नेपाल ज़रूरी सामानों की किल्लत से लंबे समय तक जूझता रहा.
यह नाकेबंदी नेपाल के नए संविधान पर मधेसियों की आपत्ति के कारण थी. नेपाल में मधेसियों की जड़ें भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार से जुड़ी हैं. इस दौरान नेपाल की राजनीति में भारत के ख़िलाफ़ एक किस्म का ग़ुस्सा पनपा और चीन से सहानुभूति पैदा हुई.
भारत ने नेपाल के संविधान में बिना किसी संशोधन के ही नाकेबंदी ख़त्म की, लेकिन तब तक हालात हाथ से निकल गए थे. 2018 में खड़ग प्रसाद ओली फिर से पीएम बने तो उन्होंने चीन के साथ कई समझौते किए.
नेपाल चीन की महत्वाकांक्षी योजना वन बेल्ट वन रोड में भी शामिल हो गया. सार्क देशों में भूटान को छोड़ सभी देश चीन की इस परियोजना में शामिल हो गए हैं. यह भारत के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है.
इसी तरह अफ़ग़ानिस्तान में भी तालिबान हार नहीं रहा. कहा जा रहा है कि अंततः तालिबान और पाकिस्तान के समझौते से ही कोई रास्ता निकलेगा. अफ़गानिस्तान की सत्ता में तालिबान का प्रभाव बढ़ेगा तो बदले हालात में वो भारत के बजाय पाकिस्तान को ही तवज्जो देगा.
ईरान के साथ भारत के अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन भारत यहां भी अमरीका को समझाने में नाकाम रहा कि वो ईरान से तेल आयात करेगा. ईरान में भारत चाबहार पोर्ट विकसित करना चाह रहा है. लेकिन इसके लिए भारत को अमरीका के प्रभाव से मुक्त होना होगा.
बांग्लादेश में इसी साल दक्षिणी और उत्तरी बांग्लादेश को जोड़ने वाला पुल बनकर तैयार हो जाएगा. इस पुल को चीन बना रहा है. छह किलोमीटर लंबा यह पुल दोनों इलाक़ों को सड़क और रेल के ज़रिए जोड़ेगा. बांग्लादेश बनने के बाद से यह इंजीनियरिंग की सबसे चुनौतीपूर्ण परियोजना थी जो बनकर तैयार होने वाली है.
यह सेतु पद्मा नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक है. फ़ाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार इस पुल के निर्माण में चीन ने 3.7 अरब डॉलर की रक़म लगाई है. चीन ने इसमें न केवल पैसा दिया है बल्कि इंजीनियरिंग में भी मदद की है.
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने भी बांग्लादेश में इस पुल को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है और कहा है कि दोनों देशों के बीच बढ़ती दोस्ती का यह नया प्रतिमान है.
भारत को उस वक़्त और तगड़ा झटका लगा था जब बांग्लादेश ने ढाका स्टॉक एक्सचेंज के 25 फ़ीसदी हिस्से को शंघाई और शेनज़ेन स्टॉक एक्सचेंज को 11 करोड़ 90 लाख डॉलर में बेच दिया जबकि भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को नहीं दिया था.
एनएसई के अधिकारी ढाका भी गए थे ताकि चीन को रोक सकें, लेकिन इसमें नाकामी ही हाथ लगी थी. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने ये भी तर्क दिया था कि चीन इस इलाक़े में राजनीतिक ताक़त का इस्तेमाल कर रहा है.
आख़िर भारत को इतने झटके क्यों लग रहे हैं? पवन वर्मा कहते हैं, ''वर्तमान सरकार की विदेशी नीति में एक रणनीतिक अभाव है. हम एडहॉक पॉलिसी पर चल रहे हैं. हम रिएक्टिव हैं जबकि हमें प्रोएक्टिव होना चाहिए था. पाकिस्तान के साथ तो एक रणनीतिक सोच का ख़ास अभाव है. चीन का जिस तरह से प्रभाव बढ़ रहा है उससे साफ़ है कि कूटनीतिक असफलता हम झेल रहे हैं. चाणक्य के देश में कूटनीति बिना रणनीति के चल रही है. मालदीव में इतना कुछ अचानक तो नहीं हुआ. हर चीज़ की पृष्ठभूमि पहले से तैयार होती है, लेकिन भारत कर क्या रहा था. मालदीव से हमारा प्रभाव बिल्कुल ख़त्म हो गया है.''
पवन वर्मा कहते हैं, ''कूटनीतिक पहलू पर भारत के सेना प्रमुख का भी बयान आता है. सरकार में कहीं न कहीं व्यवस्थागत ख़ामियां हैं. रणनीति बनाने में विदेश मंत्रालय को आप दरकिनार नहीं कर सकते. विदेश मंत्रालय की उपेक्षा की जा रही है. मुझे क्या, इस बात का एहसास सुषमा स्वराज को भी है कि उनके मंत्रालय की उपेक्षा हो रही है. वर्तमान सरकार की विदेश नीति में रणनीति और दूरदर्शिता का अभाव है.''

Tuesday, September 4, 2018

河北政绩考核取消“人均GDP及增长率”指标

官员考核政绩先看GDP,这一直被认为是环境保护斗不过污染企业的根源。近日,中国河北省率先取消了政绩考核体系中“人均 及增长率”这一指标。
      据《中国环境报嘉宾作者诺林·海德尔,驻巴基斯坦记者、教育工作者。
在64年以前的世界地图上,印度和巴基斯坦就作为两个独立的国家而现实存在着。然而,还存在着另一种现实,从远古时代开始,也就是在地图和国界线出现以前,这块土地就已经存在着那些山川河流、花草树木、各种生灵。无论地理和政治如何划分,都没法将土地和自然资源完全分开。
印度和巴基斯坦可以说是两个独立的国家,但是,他们却共享着绵延几千公里的国境线。事实上,他们之间没有像山脉、海洋或者河流这样的物理性阻隔。相反,河流使得这两个邻国之间的联系亘古弥长。
河流相比其他物理特征更能说明“自然无国界”这一观点。河流是文明的生命线,是文化、歌曲、音乐、舞蹈、饮食、服饰和诗歌的守护者。河流如同城市永恒的监护人,细心培养,令其成长。河流是知识发展、进步、寻求的象征。在印度和巴基斯坦的背景下,即使一条河也会产生一道分割线。但所有的河流,无论从东旁遮普流到西旁遮普还是来自北方支流,最终都会汇入印度河,并继续他们最后的里程,直到阿拉伯海。
印度和巴基斯坦一直进行着河流的争夺。虽然《印度河流域用水公约》已经约定共享这一条河流,但是争吵却一直没有停止过。这其中是存在着许多政治和战略上的因素。虽然现在已经建立了水资源管理委员会,并且每年都有高水平代表团进行频繁的意见交流,但是双方似乎都对河水的分配问题不甚满意。
这种争论缘来已久,所以没有必要再重复,但是二者争论的底线是相同的:即,每个国家都想为了自己的既得利益,为了自己的人民以及政治战略而获取最大的效益。但似乎没有人在这场利益的角逐中思考过河流的权利。这些河流的历史,远远长于在这里生存的人类、国家、政府甚至政治,它们对这片土地拥有最古老的权属。
在印巴区域气候变化与灾难的风险控制大会上,这个主题被重新提出。该会议7月在巴基斯坦的拉合尔召开,这是一场很重要的大会,它为学者提供了一个讨论众多跨国界合作问题的平台,如气候变化、水资源共享以及河流和灾难管理。会议由社会市场中心的行政长官马里尼·梅赫拉主办,并召集了来自印度、巴基斯坦和世界各地的学者,会议不仅详细讨论了不同维度区域合作问题,还为巴基斯坦青年学者获得合作重要性的第一手知识。
无论在某些问题上的政治分歧有多大,在地区性重要事件(如印巴之间的减灾、河流水资源共享以及降低风险)上的合作以及折衷的协议总会出现。
会议的另一个目标则是,在印度旁遮普邦和巴基斯坦旁遮普邦之间更多邦际的合作中,巴基斯坦应迈出第一步。因为旁遮普区域在不久之前还是同一片土地,两岸的领土、河流和文化还没有出现太大的差异。
影响旁遮普人民的自然现象实际上也影响着双方,所以两国之间还有很多合作空间。印度政府(GOI)灾害管理局前成员梅农教授通过网络电话参加了此次会议,并提供了一些十分吸引人的实例,关于印度正在使用——并且还可改善的——灾害预警技术方法。他解释了印度是如何对淹没水位作出准确预测,从而拯救不可计数的人命和牲畜。使用相同的技术,再加入巴基斯坦的数据,就可以做出更好、更准确的涨潮预测。
宪法第十八修正案的通过使巴基斯坦第一次把完整的省级自治权给予联邦单位,现在对于像气候变化和降低灾害风险这些可以从更区域性角度解决的问题就有了更广阔的空间。
在最近省级自治权成立之后,为这些行政省打开第二扇机会之门的则是对学校课程发展的控制。因此,更多的地方特色课程很有可能被开发,特别是在地理和科学学科中,内容包括对灾害、降低灾害风险、灾害准备以及学校安全计划的概念。
在这一方面,印度遥遥领先,而巴基斯坦还有很多关于降低灾害风险和气候变化的儿童专用材料的准备工作要做。巴基斯坦旁遮普邦可以从一些已经完成的工作中受益。
我认为现在正是捍卫河流的时候了。我为这些河流呐喊,也为我家乡的拉维河呐喊。由于水域划分,拉维河已经不再流动,成为一潭死水。曾经奔腾不息的河流如今奄奄一息。我请求印度和印度的儿女对拉维河再仁爱一些,不要管条约上写了什么,让拉维河再次流淌、再次活跃。不论这河水如同恒河和印度河般湍急,还是如同拉维河和萨特莱杰河般平缓,河水是我们共同的资源、我们共同的遗产。
不要让河水成为我们之间差异的受害者。未来的唯一希望就在于对和平的合作与承诺。地图上的界线不可或缺,但是河流所代表的界线更为重要:那是地球母亲的生命线。
此博客由刘耕源、胡洁萍翻译。
》8月15日报道,近日,河北省委、省政府干部考核工作领导小组发出通知,对设区市党政领导班子和主要领导干部工作实绩综合考核评价实施办法中的定量指标进行调整,“人均GDP及增长率”首次从政绩考核体系中消失。
      原有19项指标减掉两项,新增7项,调整后考核指标为24项。新增7项指标中,有3项为节能减排指标,为“单位GDP二氧化碳排放量降低率”一项和“氨氮排放量削减率”、“氮氧化物排放量削减率”两个子项的指标。
      负责此次干部考核定量指标调整工作的河北省委组织部官员介绍,减掉的两项内容为“人均GDP及增长率”、“城镇固定资产投资及增长率”,增加的7项内容为重点项目建设、工业聚集区发展、单位GDP二氧化碳排放量降低率、保障性安居工程建设、食品综合抽检合格率、基本医疗保险参保率、群众安全感及提高幅度。
      该报道称,此举“宣告了‘ ’以单独身份出现在河北省干部考核指标体系中的时代的结束”——新考核体系中, 仍以参照数据出现。“人均地方财政收入及增长率”改为“财政收入占GDP比重”。此外,在整个考核指标体系中,GDP还有两次出现,均在资源环境类的能耗降低指标里,一个是“单位GDP能耗降低率”,另一个是“单位GDP二氧化碳排放量降低率”。
      新的指标增设了重点项目建设和工业聚集区发展指标。工业聚集区发展指标主要包括“工业聚集区企业主营业务收入及增长率”、“工业聚集区固定资产投资及增长率”、“工业聚集区省外资金到位额及增长率”3项指标。
      河北省是工业大省,对能源资源依赖性强。此举将对其工业污染的限制和节能减排发挥多大作用?有待时间检验。
      中国经济以环境资源为代价发展,令民间普遍认为政绩考核“以GDP论英雄”早该改革。中国曾探索“绿色GDP”核算方法,但仅于2006年发布过唯一一次《中国绿色国民经济核算研究报告2004》,此后便搁浅。