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उन्होंने कहा, "अगर बच्चे प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यता के बारे में
पूछेंगे, तो आप उन्हें क्या बताएंगे...? लोगों को उनकी शैक्षिक योग्यता के
बारे में नहीं पता... कौन-सी ताकतें हैं, जो दिल्ली विश्वविद्यालय को उनकी
डिग्री जारी करने से रोक रही हैं, जबकि दावा किया जाता है कि वह वहीं पढ़े
हैं..."
हालांकि, संजय निरूपम के बयान पर भाजपा नेताओं ने कड़ा विरोध जताया. भाजपा की महाराष्ट्र इकाई की प्रवक्ता शाइना एनसी ने निरुपम को ‘‘मानसिक तौर पर विक्षिप्त’’ करार दिया. इससे पहले भी संजय निरूपम अपने बयान को लेकर विवादों में फंस चुके हैं. संयज निरुपम ने एक बार कहा था कि , ' देश में वफादारी का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है वजुभाई वाला जी ने. शायद हिंदुस्तान का हर आदमी अपने कुत्ते का नाम वजुभाई वाला ही रखेगा, क्योंकि इससे ज्यादा वफादार तो कोई हो ही नहीं सकता. ' हालांकि, उनके इस बयान पर भी काफी बवाल हुआ था. नई दिल्ली: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बुधवार को तत्काल प्रभाव से मानव उपयोग के उद्देश्य से 328 एफडीसी (फिक्स्ड डोज कांबिनेशन या निश्चित खुराक संयोजन) के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार ने जिन दवाओंइससे पहले केंद्र सरकार ने 2016 के मार्च में औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, की धारा 26ए के तहत मानव उपयोग के उद्देश्य से 344 एफडीसी के उत्पादन, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया था.इसके बाद सरकार ने समान प्रावधानों के तहत 344 एफडीसी के अलावा पांच और एफडीसी को प्रतिबंधित कर दिया था. हालांकि, इससे प्रभावित उत्पादकों अथवा निर्माताओं ने देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में इस निर्णय को चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 दिसम्बर, 2017 को सुनाए गए फैसले में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए इस मसले पर दवा
तकनीकी सलाहकार बोर्ड द्वारा गौर किया गया, जिसका गठन औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 5 के तहत हुआ था. इस बोर्ड ने इन दवाओं पर अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंप दी.दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड ने अन्य बातों के अलावा यह सिफारिश भी की कि 328 एफडीसी में निहित सामग्री का कोई चिकित्सीय औचित्य नहीं है और इन एफडीसी से मानव स्वास्थ्य को खतरा पहुंच सकता है.बोर्ड ने सिफारिश की कि औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत व्यापक जनहित में इन एफडीसी के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है. सरकार ने जिन दवाओं पर रोक लगाई है, उनमें सेरिडॉन, डिकोल्ड, जिंटाप, सुमो, जीरोडॉल, फेंसिडील, विक्स एक्शन 500, कोरेक्स और कई तरह के ऐंटीबायॉटिक्स, पेन किलर्स, शुगर और दिल के रोगों की दवाएं शामिल हैं. अभी और भी कई एफडीसी दवाएं हैं, जो देश में बिक रही हैं. माना जा रहा है कि सरकार 500 और एफडीसी पर रोक लगा सकती है. पर रोक लगाई है उनमें वो दवाएं हैं जो लोग जल्द आराम पाने के लिए मेडिकल शॉप से बिना पर्चे के खरीद लेते हैं. इसमें कई दवाएं सिरदर्द, जुकाम, दस्त, पेट दर्द जैसी बीमारी में ली जाती हैं. इसके अलावा मंत्रालय ने कुछ शर्तो के साथ छह एफडीसी के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण को भी प्रतिबंधित कर दिया है.
नई दिल्ली: भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या द्वारा भारत छोड़ने से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से अपनी मुलाकात का दावा करने के बाद विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया. हालांकि, जेटली ने माल्या के बयान को ‘तथ्यात्मक तौर पर गलत’ करार दिया. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माल्या के ‘अत्यंत गंभीर आरोपों’ की स्वतंत्र जांच के आदेश तुरंत देने चाहिए और जेटली को जांच जारी रहने के दौरान अपना पद छोड़ देना चाहिए. वहीं इस बीच कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया ने कहा है कि उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली और विजय माल्या को संसद के सेंट्रल हॉल में एक-दूसरे से बातचीत करते हुए देखा था. उन्होंने कहा कि यह बात उस दिन की सी
सीटीवी फुटेज देखने के बाद साबित हो सकती है.
वहीं बीजेपी के पूर्व नेता एवं पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि न सिर्फ वित्त मंत्री जेटली बल्कि पूरे भाजपा नेतृत्व को माल्या से अपने संबंधों पर बेदाग सामने आना चाहिए. कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘माल्या ने दो चीजें कही हैं.पहली कि उसने वित्त मंत्री से व्यवस्थित ढंग से मुलाकात की थी और दूसरी यह कि उसने मामले को सुलझाने की पेशकश की थी.इस मामले का पूरा खुलासा होना चाहिए.व्यापक स्पष्टीकरण आना चाहिए और व्यापक जांच होनी चाहिए.’ उन्होंने सवाल किया, ‘जब बैंकों को मालूम था, वित्त मंत्रालय को मालूम था, पूरी सरकार को मालूम था और माननीय प्रधानमंत्री को मालूम था कि माल्या पर इतना बड़ा कर्ज बकाया है.ऐसे में उसे देश से बाहर क्यों जाने दिया गया.यह बुनियादी सवाल है जिसका उत्तर पूरा देश जानना चाहता है.’
माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि माल्या के भारत से भागने के वाकये ने एक बार फिर इस बात की पुष्टि कर दी कि मोदी सरकार ‘बड़े डिफॉल्टरों को जनता के पैसे लूट कर भागने देती है.असल मुद्दा यह है कि लुकआउट नोटिसों के बाद भी वह कैसे भाग गया?’ आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने माल्या की ओर से किए गए खुलासे को ‘बिल्कुल चौंकाने वाला’ करार दिया और सवाल किया, ‘वित्त मंत्री ने अब तक इस सूचना को छुपाए क्यों रखा?’ केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीरव मोदी के देश छोड़कर जाने से पहले उससे मिलते हैं.विजय माल्या के देश छोड़कर जाने से पहले वित्त मंत्री उससे मिलते हैं.इन बैठकों में क्या पकाया जा रहा था? जनता यह जानना चाहती है.'
हालांकि, संजय निरूपम के बयान पर भाजपा नेताओं ने कड़ा विरोध जताया. भाजपा की महाराष्ट्र इकाई की प्रवक्ता शाइना एनसी ने निरुपम को ‘‘मानसिक तौर पर विक्षिप्त’’ करार दिया. इससे पहले भी संजय निरूपम अपने बयान को लेकर विवादों में फंस चुके हैं. संयज निरुपम ने एक बार कहा था कि , ' देश में वफादारी का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है वजुभाई वाला जी ने. शायद हिंदुस्तान का हर आदमी अपने कुत्ते का नाम वजुभाई वाला ही रखेगा, क्योंकि इससे ज्यादा वफादार तो कोई हो ही नहीं सकता. ' हालांकि, उनके इस बयान पर भी काफी बवाल हुआ था. नई दिल्ली: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बुधवार को तत्काल प्रभाव से मानव उपयोग के उद्देश्य से 328 एफडीसी (फिक्स्ड डोज कांबिनेशन या निश्चित खुराक संयोजन) के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार ने जिन दवाओंइससे पहले केंद्र सरकार ने 2016 के मार्च में औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, की धारा 26ए के तहत मानव उपयोग के उद्देश्य से 344 एफडीसी के उत्पादन, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया था.इसके बाद सरकार ने समान प्रावधानों के तहत 344 एफडीसी के अलावा पांच और एफडीसी को प्रतिबंधित कर दिया था. हालांकि, इससे प्रभावित उत्पादकों अथवा निर्माताओं ने देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में इस निर्णय को चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 दिसम्बर, 2017 को सुनाए गए फैसले में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए इस मसले पर दवा
तकनीकी सलाहकार बोर्ड द्वारा गौर किया गया, जिसका गठन औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 5 के तहत हुआ था. इस बोर्ड ने इन दवाओं पर अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंप दी.दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड ने अन्य बातों के अलावा यह सिफारिश भी की कि 328 एफडीसी में निहित सामग्री का कोई चिकित्सीय औचित्य नहीं है और इन एफडीसी से मानव स्वास्थ्य को खतरा पहुंच सकता है.बोर्ड ने सिफारिश की कि औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत व्यापक जनहित में इन एफडीसी के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है. सरकार ने जिन दवाओं पर रोक लगाई है, उनमें सेरिडॉन, डिकोल्ड, जिंटाप, सुमो, जीरोडॉल, फेंसिडील, विक्स एक्शन 500, कोरेक्स और कई तरह के ऐंटीबायॉटिक्स, पेन किलर्स, शुगर और दिल के रोगों की दवाएं शामिल हैं. अभी और भी कई एफडीसी दवाएं हैं, जो देश में बिक रही हैं. माना जा रहा है कि सरकार 500 और एफडीसी पर रोक लगा सकती है. पर रोक लगाई है उनमें वो दवाएं हैं जो लोग जल्द आराम पाने के लिए मेडिकल शॉप से बिना पर्चे के खरीद लेते हैं. इसमें कई दवाएं सिरदर्द, जुकाम, दस्त, पेट दर्द जैसी बीमारी में ली जाती हैं. इसके अलावा मंत्रालय ने कुछ शर्तो के साथ छह एफडीसी के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण को भी प्रतिबंधित कर दिया है.
नई दिल्ली: भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या द्वारा भारत छोड़ने से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से अपनी मुलाकात का दावा करने के बाद विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया. हालांकि, जेटली ने माल्या के बयान को ‘तथ्यात्मक तौर पर गलत’ करार दिया. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माल्या के ‘अत्यंत गंभीर आरोपों’ की स्वतंत्र जांच के आदेश तुरंत देने चाहिए और जेटली को जांच जारी रहने के दौरान अपना पद छोड़ देना चाहिए. वहीं इस बीच कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया ने कहा है कि उन्होंने वित्त मंत्री अरुण जेटली और विजय माल्या को संसद के सेंट्रल हॉल में एक-दूसरे से बातचीत करते हुए देखा था. उन्होंने कहा कि यह बात उस दिन की सी
सीटीवी फुटेज देखने के बाद साबित हो सकती है.
वहीं बीजेपी के पूर्व नेता एवं पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि न सिर्फ वित्त मंत्री जेटली बल्कि पूरे भाजपा नेतृत्व को माल्या से अपने संबंधों पर बेदाग सामने आना चाहिए. कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘माल्या ने दो चीजें कही हैं.पहली कि उसने वित्त मंत्री से व्यवस्थित ढंग से मुलाकात की थी और दूसरी यह कि उसने मामले को सुलझाने की पेशकश की थी.इस मामले का पूरा खुलासा होना चाहिए.व्यापक स्पष्टीकरण आना चाहिए और व्यापक जांच होनी चाहिए.’ उन्होंने सवाल किया, ‘जब बैंकों को मालूम था, वित्त मंत्रालय को मालूम था, पूरी सरकार को मालूम था और माननीय प्रधानमंत्री को मालूम था कि माल्या पर इतना बड़ा कर्ज बकाया है.ऐसे में उसे देश से बाहर क्यों जाने दिया गया.यह बुनियादी सवाल है जिसका उत्तर पूरा देश जानना चाहता है.’
माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि माल्या के भारत से भागने के वाकये ने एक बार फिर इस बात की पुष्टि कर दी कि मोदी सरकार ‘बड़े डिफॉल्टरों को जनता के पैसे लूट कर भागने देती है.असल मुद्दा यह है कि लुकआउट नोटिसों के बाद भी वह कैसे भाग गया?’ आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने माल्या की ओर से किए गए खुलासे को ‘बिल्कुल चौंकाने वाला’ करार दिया और सवाल किया, ‘वित्त मंत्री ने अब तक इस सूचना को छुपाए क्यों रखा?’ केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीरव मोदी के देश छोड़कर जाने से पहले उससे मिलते हैं.विजय माल्या के देश छोड़कर जाने से पहले वित्त मंत्री उससे मिलते हैं.इन बैठकों में क्या पकाया जा रहा था? जनता यह जानना चाहती है.'