Wednesday, December 26, 2018

اتصالات دبلوماسيين أوروبيين تتعرض لقرصنة إلكترونية على مدى سنوات

استهدف قراصنة الكترونيون بنجاح اتصالات دبلوماسية في الاتحاد الأوروبي خلال فترة امتدت لعدة سنوات، بحسب ما يقوله تقرير لصحيفة نيويورك تايمز.
فقد رصدت آلاف الرسائل أشار فيها دبلوماسيون إلى عدد من الموضوعات تتراوح ما بين الرئيس الأمريكي، دونالد ترامب، والتجارة العالمية.
وقد اكتشف الاختراق - بحسب ما أفاد التقرير - شركة "إيريا 1" للأمن الإلكتروني.
ويقول مسؤولون أوروبيون إن المعلومات السرية والخاصة لم تتأثر بسبب هذا الاختراق الذي استمر ثلاث سنوات.
ونقلت نيويورك تايمز عن خبير قوله إن الطرق التي استخدمها القراصنة تماثل تلك التي استخدمها في السابق الجيش الصيني.
وأضاف: "بعد نحو عقد من الزمن من مواجهة العمليات الإلكترونية الصينية ... ليس هناك شك في أن هذه الحملة ذات صلة بالحكومة الصينية".
وتكشف إحدى الرسائل المخترقة، والتي تعرف بالبرقيات الدبلوماسية، تبادلا وصف دبلوماسيون فيه الاجتماع الذي تم في يوليو/تموز بين الرئيس ترامب ونظيره الروسي الرئيس فلاديمير بوتين بأنه كان "ناجحا على الأقل بالنسبة إلى بوتين".
ونقل عن شي قوله في الرسالة إن الصين "لن تخضع لأي استقواء" من واشنطن "حتى إذا أضرت الحرب التجارية بالجميع".
وقد تردد صدى هذه التعليقات في الخطاب الذي ألقاه الرئيس الصيني الثلاثاء، وقال فيه: "لا يستطيع أحد أن يملي على الشعب الصيني ما يفعله، وما لا يفعله".
وأشارت منظمات أخرى، منها الأمم المتحدة، إلى أنها تعرضت هي الأخرى لاختراق، وأخذت حذرها منذ اكتشاف الأمر.
تصدت أنظمة الدفاع السورية لهجوم شنته طائرات حربية إسرائيلية بالقرب من دمشق، حسبما أفادت وسائل إعلام رسمية في سوريا.
وأظهرت تسجيلات مصورة، تداولها مستخدمون لوسائل التواصل الاجتماعي، جسما يتحرك في سماء المدينة قبل أن يدوي صوت انفجار وقذائف مدفعية.
ونقلت الوكالة العربية السورية للأنباء (سانا) عن مصدر عسكري قوله "تصدت وسائط دفاعنا الجوي لصواريخ معادية أطلقها الطيران الحربي الإسرائيلي من فوق الأراضي اللبنانية".
وأضاف المصدر "اقتصرت أضرار العدوان على مخزن ذخيرة وإصابة ثلاثة جنود بجروح".
بدوره، قال "المرصد السوري لحقوق الإنسان" المعارض، ومقره لندن، إن إسرائيل أطلقت صورايخ من فوق الأراضي اللبنانية واستهدفت مناطق غربي وجنوب غربي ريف دمشق.
ورفضت متحدثة باسم الجيش الإسرائيلي التعليق.
وفي وقت لاحق، قال الجيش الإسرائيلي إن "نظاما للدفاع الجوي تم تفعيله في مواجهة صاروخ مضاد للطائرات أُطلق من سوريا. لا تقارير عن أضرار أو إصابات".
في الوقت نفسه، أوردت وكالة الأنباء الرسمية في لبنان أن مقاتلات حربية إسرائيلية نفذت "غارات وهمية" في أجواء النبطية وإقليم التفاح جنوبي البلد.
وخلال سبعة أعوام من الحرب في سوريا، شعرت إسرائيل بقلق بالغ إزاء تنامي نفوذ إيران، عدوها الرئيسي في المنطقة، والحليف البارز للرئيس السوري بشار الأسد.
وضربت القوات الإسرائيلية عشرات الأهداف التي وصفتها بأنها تابعة لإيران أو جماعة حزب الله اللبنانية.

Monday, November 5, 2018

5 लोगों की हत्या पर केंद्रीय रेल राज्य मंत्री और कांग्रेसी सांसद पर लगा भड़काने का आरोप

का मामला तूल पकड़ रहा है. इस मामले में बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री राजेन गोहेन (   )  तथा कांग्रेस  सांसद सुष्मिता देव(  ) पर लोगों को भड़काने का आरोप लगा है. जिस पर उनके खिलाफ केस दर्ज हुआ है. तिनसुकिया कांड के सिलसिले में असम में दो समुदायों में दरार पैदा करने के मकसद से भड़काऊ बयान देने के आरोप में कुल चार अन्य नेताओं के खिलाफ सोमवार को प्राथमिकी दर्ज की.पुलिस ने कहा कि एक्स-उल्फा यूनाइटेड प्लैटफॉर्म की बराक इकाई के महासचिव इनामुल हक लश्कर की ओर से सिलचर सदर पुलिस थाने में शिकायत दाखिल की गई थी.रेल राज्य मंत्री राजेन के अलावा भाजपा विधायक शिलादित्य देव, पार्टी के नेता प्रदीप दत्ता राय, कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव, पार्टी विधायक कामलख्या डे पुरकायस्थ और चंदन सरकार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है.
टिप्पणियां
इन नेताओं के खिलाफ दर्ज की गई प्राथमिकी में किसी खास बयान का जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन आरोप है कि उन्होंने कई मौकों पर भड़काऊ बयान दिए. गुरुवार शाम को असम के तिनसुकिया में धोला पुलिस थाने के तहत आने वाले खेरोनिबाड़ी गांव में पांच बंगाली भाषी लोगों की हत्या कर दी गई थी। इनमें तीन मृतक एक ही परिवार के सदस्य थे.असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को इन हत्याओं के लिए कुछ लोगों एवं संगठनों के भड़काऊ बयानों को जिम्मेदार माना था. इससे पहले, असम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष देवव्रत सैकिया ने सोमवार को तिनसुकिया हत्याकांड की न्यायिक जांच कराने की मांग की. (इनपुट भाषा से)नई दिल्ली: केरल के सबरीमाला मंदिरसबरीमाला मंदिर के खुलने के दूसरे दिन भी मासिक धर्म की उम्र सीमा में आने वाली महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ में प्रदर्शन जारी है. पुलिस ने बाद में पुष्टि की कि 52 साल की महिला ने मंदिर परिसर में प्रवेश करने की कोशिश की. पुलिस पूरी सुरक्षा के साथ पुलिस स्टेशन महिला और उसके बेटे को ले गई. प्रदर्शन के बीच पत्रकारों पर पंबा बेस कैंप के पास हमले किए गये. जिसमें एक कैमरापर्सन घायल हो गया. सोमवार को इस इलाके में कानून-व्यवस्था कायम करने के लिए मंदिर परिसर में 20 कमांडो टीम और करीब 100 महिला पुलिसकर्मियों के साथ-साथ एक हजार सुरक्षाबलों को तैनात किया गया था.

बता दें कि अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच दो दिवसीय विशेष पूजा के लिए तीन हफ्ते में दूसरी बार भगवान अयप्पा मंदिर के दरवाजे सोमवार को यहां खोले गए. आशंका थी कि मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश संबंधी उच्चतम न्यायालय के आदेश का विरोध करने वाले यहां प्रदर्शन कर सकते हैं. बता दें कि पम्बा वह स्थान है जहां से श्रद्धालु पर्वत चोटी पर स्थित सबरीमला मंदिर तक पांच किलोमीटर तक पैदल जाते हैं. इससे पहले, सबरीमला को लगभग किले में तब्दील कर दिया गया. 
(सबरीमला मंदिर) में अभी भी 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश को लेकर घमासान जारी है. मंगलवार की सुबह प्रदर्शन कर रहे श्रद्धालुओं ने मीडिया के लोगों को निशाना बनाया, जिसमें एक फोटो पत्रकार घायल हो गया. बता दें कि सन्निधानम या मंदिर के अंदर वाले आंगन में मंदिर द्वारा प्रतिबंधित आयु वर्ग की एक महिला के प्रवेश की खबरों के बाद सैकड़ों प्रदर्शनकारी जमा हो गए. प्रदर्शनकारियों को ऐसी खबर मिली कि एक महिला ने मंदिर में घुसने का प्रयास किया था, जिसके बाद वहां अशांत स्थिति उत्पन हो गई.

Monday, October 15, 2018

ब्लॉग: #MeToo और 'तेरा पीछा ना छोड़ूँगा सोणिए’

कुछ समय पहले गाँव से पुराना रेडियो ले आया हूँ. सुबह-सुबह रेडियो सुनते हुए दफ़्तर के लिए तैयार होते हुए वो दिन याद आते हैं जब हम स्कूल के लिए तैयार होते थे और घर के एक कोने में रेडियो बजता रहता था.
हर महीने की पहली तारीख़ को किशोर कुमार का गाना बजता था - ख़ुश है ज़माना आज पहली तारीख़ है…. पहली को तनख़्वाह मिलने का दिन होता था. ये गाना सुनकर सभी ख़ुश दिखते थे.
रात को सोने से पहले पौने नौ बजे तराई की अँधेरी बस्तियों में रेडियो पर तक़रीबन रोज़ाना एक बुलंद आवाज़ गूँजती थी - ये आकाशवाणी है. अब आप देवकीनंदन पांडेय से समाचार सुनिए.
जैसे इन दिनों लगभग हर समाचार बुलेटिन की शुरुआत 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है' से होती है, तब देवकीनंदन पांडेय का पहला वाक्य होता था - प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी ने कहा है...
पौने नौ की ख़बरें सुनते सुनते हमें नींद आ जाती थी.
उन दिनों किशोर कुमार का एक पुराना गाना काफ़ी पॉपुलर था- लड़की चले जब सड़कों पे, आई क़यामत लड़कों पे. हम इतने बड़े तो थे कि ख़ुद के लड़का होने का एहसास हो, मगर इतना समझने लायक़ बड़े नहीं हुए थे कि लड़की के सड़कों पर चलने से लड़कों पर क़यामत कैसे आ जाएगी. वो अपने रस्ते जा रही है, हम अपने रस्ते!
क़यामत का गहरा अर्थ न भी मालूम हो फिर भी ये ज़रूर समझ में आता था कि क़यामत आने का मतलब कुछ गड़बड़ होना होता है. मसलन, अगर होमवर्क किए बिना स्कूल चले गए तो क़यामत आ सकती है.
हमें फ़िल्में देखने की मनाही का सवाल ही नहीं था क्योंकि गाँव के आसपास मीलों तक कोई सिनेमा हॉल ही नहीं था. पर रेडियो के ज़रिए किशोर कुमार से हम सीख रहे थे कि जब लड़कियाँ सड़कों पर चलती हैं तो लड़कों पर क़यामत आने का ख़तरा बना रहता है.
रविवार, 14 अक्तूबर, 2018. लौटते हैं वर्तमान में.
छुट्टी का दिन. बाहर फैली धूप सर्द दिनों के आने के संकेत दे रही है. सुबह सुबह गाँव से लाए रेडियो पर फिर से किशोर कुमार के गाने आ रहे हैं:
ग़-ग़-ग़ ग़ुस्सा इतना हसीन है तो प्यार कैसा होगा,
ऐसा जब इनकार है, इक़रार कैसा होगा...
मैं अंदाज़ा लगाता हूँ कि हिरोइन ग़ुस्से में होगी और हीरो उसे ये गाना गाकर और चिढ़ा रहा है. हिरोइन तुनक कर आगे बढ़ना चाहती होगी पर हीरो उसका रास्ता रोक रहा है. हिरोइन जितना ग़ुस्सा दिखाए, जितना इनकार करे, हीरो को लगता है वो हसीन दिख रही है. अगर प्यार जताए तो प्यार कैसा होगा.
कॉमर्शियल ब्रेक के बाद एक और गाना शुरू होता है. एक बार फिर से किशोर कुमार की आवाज़ में:
तेरा पीछा ना छोड़ूँगा सोणिए, भेज दे चाहे जेल में… दो दिलों के मेल में.
इसमें भी हिरोइन ख़ामोश है - अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि हीरो उसका पीछा कर रहा है और वो इससे ख़ुश नहीं है. पर किशोर कुमार की आवाज़ से साफ़ समझ में आता है कि हिरोइन के ग़ुस्से से हीरो को कुछ फ़र्क नहीं पड़ता. वो ऐलानिया कहता है - पीछा नहीं छोड़ूंगा, चाहे जेल भेज दे.गले कॉमर्शियल ब्रेक से पहले रेडियो के आरजे की शरारत भरी, चुलबुली आवाज़ गूंजती है - शराफ़त मेरे जिस्म से टपकती है… टपक, टपक, टपक. फिर एक 'कूल' सी शहरी हँसी. और फिर बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ जैसी किसी सरकारी योजना का विज्ञापन शुरू हो जाता है.
मैंने वो तीनों फ़िल्में नहीं देखीं थीं जिनके गाने मैं सुन रहा था. पर यू-ट्यूब में सब कुछ उपलब्ध है.
सड़क पर जा रही सिमी ग्रेवाल के पीछे पीछे मयूर-नृत्य करते हुए राकेश रोशन दिखे. यानी सिमी ग्रेवाल वो लड़की है जो सड़कों पर चल रही है और राकेश रोशन वो लड़के हैं जिनपर क़यामत आन पड़ी है.
पर इस गाने को देखिए तो लगता है क़यामत राकेश रोशन पर नहीं सिमी ग्रेवाल पर टूट पड़ी है. लड़की अपने रस्ते जा रही है लेकिन एक शोहदा उसे सरे राह रोक रहा है और उलटे गाना गा रहा है - आई क़यामत लड़कों पर. सिमी ग्रेवाल लाख ग़ुस्सा दिखाए, हीरो बार बार स्क्रीन पर कभी यहाँ तो कभी वहाँ से टपक पड़ता है और कभी हीरोइन के गाल छूता है तो कभी उसके हाथ पकड़ कर उमेठता है.
क़यामत तो लड़की पर आ रही है.
दूसरे गाने में राजेश खन्ना उसी तरह खुली सड़क पर साड़ी में लिपटी हुई एक शरीफ़ महिला (माला सिन्हा हैं) के आगे-पीछे नाचते-गाते घूम रहे हैं और अचरज जता रहे हैं कि:
ऐसा जब इनकार है, इक़रार कैसा होगा...
हिरोइन के चेहरे पर लोकलाज है मगर हीरो के चेहरे पर 'एनटाइटिलमेंट' का भाव है. यानी हीरो कह रहा है कि हिरोइन का रास्ता रोकना उसका हक़ है. हिरोइन लोकलाज से पानी-पानी हुए जा रही है. हीरो लगातार गा रहा है - ग़ुस्सा ऐसा हसीन है तो…
अब बारी है हमारे ही-मैन धर्मेंद्र की जो हवाई जहाज़ उड़ाते हुए हेमा मालिनी को धमकी दे रहे हैं - तेरा पीछा ना छोड़ूंगा सोणिए, भेज दे चाहे जेल में.
ग़ुस्से में तमतमाई हुई हिरोइन हेमा मालिनी अपने वायरलैस सेट पर सिर्फ़ शटअप और इडियट ही कह पाती है. पर हीरो क्यों मानेगा? वो ऐलान करता है - जहाँ भी तू जाएगी मैं वहाँ चला आऊँगा… फिर धमकी देता है कि दिन में अगर तू नहीं मिली तो सपने में आकर सारी रात जगाऊँगा.

रविवार की पूरी सुबह इसी उधेड़-बुन में बीत गई कि क़यामत उस पर क्यों नहीं गिरी जो क़यामत का डर जता रहा था

Monday, October 8, 2018

भैंस पर करोड़ों क्यों ख़र्च कर रही है सरकार?

छत्तीसगढ़ में इन दिनों एक भैंस चर्चा में है. इस भैंस की क़ीमत एक करोड़ रुपये से अधिक है और इससे भी ज़्यादा महंगी है इसके रहने की जगह.
रायपुर के जिस जंगल सफ़ारी में इस भैंस को रखा गया है, उसकी प्रभारी एम मर्सी बेला कहती हैं, "इस भैंस के बाड़े को बनाने में लगभग ढाई करोड़ रुपये खर्च हुए हैं."
छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि यह भैंस, एक मादा वन भैंस की क्लोन है और दुनिया में किसी वन्य जीव की यह पहली क्लोनिंग है.
दावा है कि छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में एक बाड़े में रखी गई 'आशा' नाम की यह एक मादा वन भैंस से करनाल स्थित नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट में 12 दिसंबर 2014 को 'दीपाशा' नामक क्लोन मादा वन भैंस का जन्म हुआ.
इस क्लोन को अब छत्तीसगढ़ लाया गया है.
रायपुर के जंगल सफ़ारी में एक बाड़े में बंद इस मादा वन भैंस को अभी देखने की इजाज़त नहीं है. यहां तक कि वन विभाग के अफ़सरों को भी सेलफ़ोन या कैमरा लेकर मादा वन भैंस के बाड़े के आसपास फटकने नहीं दिया जा रहा है.
लेकिन इस क्लोन की शुद्धता को लेकर सवाल उठने लगे हैं.ज्ञानिकों का कहना है कि जिसे छत्तीसगढ़ सरकार वन भैंस का क्लोन बता रही है, उसकी विस्तृत वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए.
इस कथित वन भैंस का क्लोन तैयार करने वाले करनाल स्थित नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टिट्यूट के प्रमुख वैज्ञानिक और एनिमल बॉयोटेक्नोलॉजी सेंटर के प्रमुख डॉ. प्रभात पाल्टा ने बीबीसी को बताया, "हमने क्लोन जंगली भैंस के 'जेनेटिक मेकअप' पर विस्तृत अध्ययन नहीं किया है. हालांकि, हमने माइक्रोसेटेलाइट मार्कर्स का उपयोग करके क्लोन जंगली भैंस के बछड़े के पितृत्व की पुष्टि की है. हालांकि, माइक्रोसेटेलाइट मार्कर्स घरेलू भैंस के हैं क्योंकि जंगली भैंस के माइक्रोसेटेलाइट मार्कर्स पर कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है."
राष्ट्रीय पशु अनुवांशिक संसाधन ब्यूरो के प्रमुख वैज्ञानिक रहे डॉ. डी के सदाना ने बीबीसी से कई दौर की बातचीत के बाद कहा कि बिना जांच के इस क्लोन को वन भैंस कह पाना मुश्किल है.
उन्होंने कहा, "किसी जीव का क्लोन आमतौर पर हूबहू होता है. लेकिन मादा भैंस आशा और उसकी क्लोन दीपाशा की तस्वीरों को देखने से दीपाशा किसी घरेलू मुर्रा नस्ल की भैंस की तरह नज़र आ रही है. जब तक इसका डीएनए मैपिंग नहीं होता, तब तक वैज्ञानिक तौर पर इसके वन्य वन भैंस होने की पुष्टि नहीं की जा सकती."
हालांकि छत्तीसगढ़ के प्रधान मुख्य वन संरक्षक आरके सिंह ने पखवाड़े भर पहले बीबीसी से बातचीत में दावा किया कि क्लोन की डीएनए मैपिंग की गई है.
दूसरी ओर नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर वन भैंस की क्लोनिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले वाइल्ड लाइफ़ ट्रस्ट के डॉ. राजेंद्र मिश्रा यह तो मानते हैं कि वन भैंस की क्लोन का रूप रंग अलग है, लेकिन उनका कहना है कि कई मामलों में दुर्भाग्य से ऐसा होता है.
क्लोन तैयार करने वाली संस्था नेशनल डेयरी रिसर्च इंस्टीट्यूट तो किसी भी तरह की डीएनए मैपिंग से इनकार कर रही है.
लेकिन डॉ. राजेंद्र मिश्रा का दावा अलग है. वे कहते हैं,"करनाल में ही क्लोन डीएनए मैपिंग की गई थी और फिर से डीएनए मैपिंग के लिये हमने सरकार को पत्र लिखा है. इसके बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी."
वन भैंसा छत्तीसगढ़ का राजकीय पशु है.
दुनिया में 90 फीसदी से अधिक वन भैसों की आबादी भारत के पूर्वोत्तर में बसती है लेकिन मध्य भारत, ख़ासकर छत्तीसगढ़ में वन भैंसों का अस्तित्व ख़तरे में है.
बाघ या हाथी जैसे वन्यजीवों की ही तरह वन भैंसा वन्य जीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 का जा
सरकार का दावा है कि छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी अभयारण्य में शुद्ध प्रजाति के केवल 11 वन भैंसे बचे हैं, जिनमें केवल दो मादा वन भैंस हैं.
हालांकि राज्य के इंद्रावती राष्ट्रीय उद्यान और पामेड़ वन्यजीव अभयारण्य में भी वन भैंसा हैं, लेकिन अब तक इन वन भैंसों को लेकर कोई विस्तृत अध्ययन नहीं हुआ है.
यही कारण है कि पिछले कई सालों से राज्य सरकार गरियाबंद के इलाक़े में बाड़े में रखकर वन भैंसों की वंश वृद्धि के लिए लगातार कोशिश करती रही है. लेकिन हर बार नर वन भैंसा का जन्म होता रहा है.
इसके बाद राज्य सरकार ने असम से शुद्ध प्रजाति के वन भैंसे लाने की कवायद शुरू की.
लेकिन इस बीच राज्य में वन भैंसों पर काम कर रही वाइल्ड लाइफ़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया ने राज्य सरकार को वन भैंसों का क्लोन तैयार करवाने का सुझाव दिया.
दस्तावेज़ बताते हैं कि वन भैंसा का क्लोन बनाने के लिये पहले छत्तीसगढ़ समेत देश के अलग-अलग हिस्सों से वन भैंसा के 69 सैंपल लिये गए. इनमें 10 सैंपल उदंती वन्यजीव अभयारण्य के थे.
हालांकि यह भी दिलचस्प है कि जिस मादा वन भैंस आशा की क्लोनिंग की गई, वह मादा वन भैंस और उसके दो बच्चे, दूसरे सभी वन भैंसों से अलग थे. जिन्हें लेकर आज भी संदेह का वातावरण है कि आशा असल में शुद्ध वन भैंस है भी या नहीं.
नवर है. इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंज़रवेशन ऑफ़ नेचर ने वन भैंसा को लुप्तप्राय प्रजाति की श्रेणी में रखा है.सी आशा नामक वन भैंस के कान के एक टुकड़े को काट कर उसे 4 डिग्री के तापमान में रख कर 24 घंटे के भीतर करनाल ले जाया गया और क्लोन बनाने की प्रक्रिया पूरी की गई.
लेकिन नेचर क्लब के सुबीर रॉय क्लोनिंग की पूरी प्रक्रिया को ही संदिग्ध और आम जनता के पैसों की बर्बादी मानते हैं. उनका कहना है कि इस क्लोन की उपयोगिता क्या होगी, इसे लेकर वन विभाग के पास कोई व्यवहारिक कार्ययोजना नहीं है.
सुबीर रॉय कहते हैं, "छत्तीसगढ़ सरकार के पास यह विकल्प था कि वह पूर्वोत्तर से शुद्ध प्रजाति के वन भैंसे लाकर यहां उनका वंश विस्तार करती, जिस पर अब जाकर सरकार काम कर रही है. इसी तरह मार्च 2015 में आशा ने ही किरण नामक मादा वन भैंसे को जन्म दिया था, उसे भी वंश विस्तार की तरह देखा जा सकता था. लेकिन सरकार ने महज पैसों की बर्बादी के लिए कथित क्लोनिंग की प्रक्रिया को अपनाया, जिसे दुनिया के अधिकांश देशों में अव्यवहारिक और अनैतिक माना जाता है."

Monday, October 1, 2018

रूस और चीन की गहराती दोस्ती क्या भारत के लिए झटका है

शीत युद्ध के बाद रूस भले अमरीका की तुलना में कमज़ोर हुआ, लेकिन अगर वो आज भी किसी देश के साथ खड़ा होता है तो अमरीका के कान खड़े हो जाते हैं.
मिसाल के तौर पर सीरिया में देखा जा सकता है. अमरीका लाख चाहता रहा कि सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद को सत्ता से बाहर किया जाए, लेकिन रूसी समर्थन ने उन्हें बचा लिया. अब दुनिया भले ही दो ध्रुवीय नहीं है, लेकिन कई मामलों में रूस और चीन आज भी अमरीकी नेतृत्व को चुनौती देते दिखते हैं.
रूस यूँ तो भारत का पारंपरिक दोस्त रहा है, लेकिन उसकी क़रीबी हाल के वर्षों में चीन से बढ़ी है. चीन और भारत के बीच 1962 में एक युद्ध हो चुका है और भारत को शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था. दोनों देशों के बीच आज भी सीमा विवाद का समाधान नहीं हो पाया है. ऐसे में रूस और चीन की दोस्ती को भारत कैसे देखता है? चीन और रूस की दोस्ती का असर भारत पर क्या पड़ेगा?
भारत और अमरीका में क़रीबी के कारण भी रूस और भारत के बीच दूरियां बढ़ी हैं. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट के अनुसार 2008-2012 तक भारत के कुल हथियार आयात का 79 फ़ीसदी रूस से होता था जो पिछले पांच सालों में घटकर 62 फ़ीसदी हो गया है.
वहीं कल तक जो पाकिस्तान हथियारों की ख़रीद अमरीका से करता था अब रूस और चीन से कर रहा है. पाकिस्तान अपनी सैन्य आपूर्ति की निर्भरता अमरीका पर कम करना चाहता है. टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट के अनुसार अमरीका और पाकिस्तान के बीच का हथियारों का सौदा एक अरब डॉलर से फिसलकर पिछले साल 2.1 करोड़ डॉलर तक पहुंच गया है.
पूर्वी रूस और साइबेरिया में इस महीने की शुरुआत में चीनी सेना एक युद्धाभ्यास में शामिल हुई. इसमें चीनी सेना के साजो-सामान भी शामिल हुए थे. इसे 1981 के बाद का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास बताया जा रहा है.
दोनों देशों के इस सैन्य अभ्यास को चीन और रूस की नई रणनीतिक जुगलबंदी के तौर पर देखा जा रहा है. पश्चिम के कई पर्यवेक्षकों ने तो इस युद्धाभ्यास को अमरीका के ख़िलाफ़ रूस और चीन की साझी तैयारी के तौर पर पेश किया.
कहा जा रहा है कि अमरीका ने चीन के ख़िलाफ़ जो ट्रेड वॉर शुरू किया और रूस के ख़िलाफ़ जो आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं, वैसे में दोनों देशों का साथ आना लाजिमी है.
चीन और रूस के बीच पिछले 25 सालों में संबंधों में गर्माहट आई है. हालांकि दोनों देशों में 1960 और 1970 के दशक में लड़ाई भी हुई है. सोवियत संघ के आख़िरी सालों से दोनों देशों की क़रीबी बढ़ने लगी थी.
आज की तारीख़ में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी है. दूसरे विश्व युद्ध के बाद दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीका और उसके सहयोगियों को रोकने के लिए साथ मिलकर कई बार वीटो पावर का इस्तेमाल किया है.
दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद रूस और चीन का वो पक्ष कई बार खुलकर सामने आया है कि दुनिया बहुध्रुवीय रहे. मध्य-पूर्व में जब अमरीका, ईरान को लेकर कठोर होता है तो रूस और चीन दोनों मिलकर उदार रुख़ का परिचय देते हैं.
दुनिया भर में सभी बड़े संघर्षों पर रूस और चीन की सोच एक जैसी है. इराक़, लीबिया, सीरिया के साथ ईरानी और कोरियाई प्रायद्वीप में परमाणु समस्या पर दोनों देश एक तरह से सोचते हैं. पिछले सात सालों से रूस का सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार चीन ही है.
हालांकि, रूस चीन से आयात बहुत कम करता है, लेकिन चीन रूस से व्यापक पैमाने पर आयात करता है. रूस से चीन जिन हथियारों की ख़रीदारी करता है, वो दुनिया के किसी और देश से नहीं करता है. इसके साथ ही रूस से चीन कई तरह का कच्चा माल आयात करता है.
रूस और चीन के बीच बुनियादी ढांचों को लेकर भी व्यापक सहयोग है. दोनों देशों के राष्ट्र प्रमुखों के कई वार्षिक समिट भी होते हैं. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की एक रिपोर्ट का कहना है कि रूस के लगभग सभी क्षेत्रों, शहरों, विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में चीन की स्थायी मौजूदगी है.
हालांकि मध्य एशिया में दोनों देशों के हितों के टकराव की भी बात कही जाती है. चीन को लेकर कहा जा रहा है कि मध्य एशिया में उसका प्रभाव तेज़ी से बढ़ रहा है और इससे रूस के हित प्रभावित होंगे. हालांकि अब ये बात भी कही जा रही है कि अमरीका से मुक़ाबला करने के लिए रूस और चीन दोनों मिलकर मध्य एशिया में काम कर रहे हैं. में सोवियत संघ का पतन हुआ तो पूरी दुनिया की नज़र इस बात पर थी कि रूस और चीन के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य और रणनीतिक संबंध कैसे होंगे. ज़ाहिर है कि भारत को लेकर दुनिया के मन में शंका नहीं थी क्योंकि भारत पहले से ही सोवियत संघ के क़रीब था.
भारत का रूस के क़रीब आना स्वाभाविक ही था. भारत का डर ये ज़रूर बना रहा कि रूस और चीन साथ आए तो उसके लिए झटका होगा. पाकिस्तान चीन का सदाबहार दोस्त रहा है और रूस से चीन की दोस्ती बढ़ी तो पाकिस्तान और रूस के रिश्तों में जमी बर्फ़ भी पिघली.
रूस और चीन के बीच की दोस्ती कोई स्वाभाविक और पारंपरिक नहीं है. दोनों देशों के बीच सदियों के अविश्वास और संघर्ष की कड़वी यादें हैं. इनमें 1968 में दोनों देशों के बीच दमेंस्की द्वीप को लेकर सैन्य संघर्ष भी हो चुका है.
हालांकि दोनों देशों ने 4000 किलोमीटर से ज़्यादा का सीमा विवाद साल 2000 में सुलझा लिया. जिस दमेंस्की द्वीप को लेकर 1968 में चीन और रूस भिड़ चुके थे वो सीमा समझौते के तहत चीन के पास है.
कूटनीति को संभावनाओं की कला कहा जाता है और किसी भी सरकार का यह पहला काम होता है कि सरहदों पर शांति कायम रखे. सरहद पर शांति को आर्थिक तरक़्क़ी के लिए ज़रूरी माना जाता है.
दुनिया के दोनों परमाणु शक्ति संपन्न इन विशाल देशों ने कलह को हमेशा के लिए सुलझा लिया. 2016 के दिसंबर महीने में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए कहा था, ''रूस और चीन के बीच व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग वैश्विक और क्षेत्रीय शांति के लिए काफ़ी अहम है. यह साझेदारी दुनिया में किसी एक देश का वर्चस्व का सामना करने में कारगर साबित होगी. इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ेगा कि वो देश कितना मजबूत है.''
दोनों देशों ने 1996 में शंघाई-5 नाम का एक संगठन बनाया था जो बाद में शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (एससीओ) बना. इस संगठन के मंच तले ही बातचीत के ज़रिए दोनों देशों ने सीमा विवाद सुलझाया.
सोवियत संघ के पतन के बाद रूस की आर्थिक स्थिति कमज़ोर हुई, लेकिन कई अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का का मानना है कि चीन के साथ रूस का संबंध कभी जी हुजूरी वाला नहीं रहा. दोनों देशों के बीच विश्वास और सहमति लगभग मुद्दों पर रहे हैं.
पिछले साल मॉस्को के एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में चीन-रूस संबंधों पर बोलते हुए रूसी विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव ने कहा था, ''यह एक ज़रूरी संबंध है और इसे बंद आंखों से आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है. अब भी हमें कई मुद्दों पर सहमति बनानी है.''
इसी सम्मेलन में रूस में 1995-98 तक चीन के राजदूत रहे ली फ़ेनलिंग ने कहा था कि दोनों देशों के बीच लंबे समय तक पारस्परिक भरोसे का अभाव रहा है.
पिछले साल मई महीने में चीन ने वन बेल्ट वन रोड समिट किया तो इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल हुए. दूसरी तरफ़ भारत वन बेल्ट वन रोड का विरोध कर रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आमंत्रण के बावजूद इस समिट में शामिल नहीं हुए थे.
पूरे इलाक़े में भारत इकलौता देश है जो चीन की इस महत्वाकांक्षी परियोजना का विरोध कर रहा है. रूस और चीन में मतभेद अगर कहीं उभरने की आशंका है तो वो है मध्य-एशिया. मध्य एशिया में रूस का वर्चस्व 200 सालों तक रहा है और चीन के आर्थिक विस्तार को लेकर वो आशंकित है.
मध्य एशिया में चीन का बढ़ता प्रभाव और अफ़ग़ानिस्तान, रूस का पाकिस्तान के साथ बढ़ता सहयोग भारत को चिंतित करने वाले हैं.
जेएनयू में रूसी अध्ययन केंद्र के प्रोफ़ेसर संजय पांडे कहते हैं, ''रूस और चीन का गठजोड़ पश्चिम और अमरीका के ख़िलाफ़ है, लेकिन इसका नुक़सान भारत को भी उठाना पड़ेगा. अब रूस पाकिस्तान की आलोचना नहीं करता है. भारत को रूस ने सुखोई लड़ाकू विमान की टेक्नॉलजी ट्रांसफर की थी, लेकिन चीन के साथ उसने ऐसा नहीं किया था. अब चीन को भी रूस इस स्तर की टेक्नॉलजी ट्रांसफर कर रहा है.''
संजय पांडे कहते हैं, ''अमरीका और पश्चिम से रूस को जैसी चुनौती मिल रही है उसमें चीन के साथ उसकी दोस्ती मजबूरी है. आज की वैश्विक व्यवस्था में रूस को चीन की ज़्यादा ज़रूरत है. ऐसे में रूस भारत के लिए चीन को नाराज़ नहीं करेगा. मेरा आकलन है कि अगर रूस को चीन और भारत में से किसी को एक को चुनना होगा तो वो तटस्थ रहेगा. लेकिन रूस का तटस्थ रहना भी भारत के ख़िलाफ़ ही माना जाएगा, क्योंकि रूस अब तक भारत का साथ देता रहा है.''

Thursday, September 13, 2018

जद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि समूची मोदी सरकार घोटालेबाजों

गे उन्होंने कहा, "अगर बच्चे प्रधानमंत्री की शैक्षिक योग्यता के बारे में पूछेंगे, तो आप उन्हें क्या बताएंगे...? लोगों को उनकी शैक्षिक योग्यता के बारे में नहीं पता... कौन-सी ताकतें हैं, जो दिल्ली विश्वविद्यालय को उनकी डिग्री जारी करने से रोक रही हैं, जबकि दावा किया जाता है कि वह वहीं पढ़े हैं..."

हालांकि, संजय निरूपम के बयान पर भाजपा नेताओं ने कड़ा विरोध जताया. भाजपा की महाराष्ट्र इकाई की प्रवक्ता शाइना एनसी ने निरुपम को ‘‘मानसिक तौर पर विक्षिप्त’’ करार दिया.
इससे पहले भी संजय निरूपम अपने बयान को लेकर विवादों में फंस चुके हैं. संयज निरुपम ने एक बार कहा था कि , ' देश में वफादारी का एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है वजुभाई वाला जी ने. शायद हिंदुस्तान का हर आदमी अपने कुत्ते का नाम वजुभाई वाला ही रखेगा, क्योंकि इससे ज्यादा वफादार तो कोई हो ही नहीं सकता. ' हालांकि, उनके इस बयान पर भी काफी बवाल हुआ था.  नई दिल्ली: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बुधवार को तत्काल प्रभाव से मानव उपयोग के उद्देश्य से 328 एफडीसी (फिक्स्ड डोज कांबिनेशन या निश्चित खुराक संयोजन) के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण पर प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार ने जिन दवाओंइससे पहले केंद्र सरकार ने 2016 के मार्च में औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, की धारा 26ए के तहत मानव उपयोग के उद्देश्य से 344 एफडीसी के उत्पादन, बिक्री और वितरण पर प्रतिबंध लगाया था.इसके बाद सरकार ने समान प्रावधानों के तहत 344 एफडीसी के अलावा पांच और एफडीसी को प्रतिबंधित कर दिया था. हालांकि, इससे प्रभावित उत्पादकों अथवा निर्माताओं ने देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में इस निर्णय को चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट द्वारा 15 दिसम्बर, 2017 को सुनाए गए फैसले में दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए इस मसले पर दवा 

तकनीकी सलाहकार बोर्ड द्वारा गौर किया गया, जिसका गठन औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 5 के तहत हुआ था. इस बोर्ड ने इन दवाओं पर अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंप दी.दवा तकनीकी सलाहकार बोर्ड ने अन्य बातों के अलावा यह सिफारिश भी की कि 328 एफडीसी में निहित सामग्री का कोई चिकित्सीय औचित्य नहीं है और इन एफडीसी से मानव स्वास्थ्य को खतरा पहुंच सकता है.बोर्ड ने सिफारिश की कि औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की धारा 26ए के तहत व्यापक जनहित में इन एफडीसी के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है. सरकार ने जिन दवाओं पर रोक लगाई है, उनमें सेरिडॉन, डिकोल्ड, जिंटाप, सुमो, जीरोडॉल, फेंसिडील, विक्स एक्शन 500, कोरेक्स और कई तरह के ऐंटीबायॉटिक्स, पेन किलर्स, शुगर और दिल के रोगों की दवाएं शामिल हैं. अभी और भी कई एफडीसी दवाएं हैं, जो देश में बिक रही हैं. माना जा रहा है कि सरकार 500 और एफडीसी पर रोक लगा सकती है. पर रोक लगाई है उनमें वो दवाएं हैं जो लोग जल्‍द आराम पाने के लिए मेडिकल शॉप से बिना पर्चे के खरीद लेते हैं. इसमें कई दवाएं सिरदर्द, जुकाम, दस्त, पेट दर्द जैसी बीमारी में ली जाती हैं. इसके अलावा मंत्रालय ने कुछ शर्तो के साथ छह एफडीसी के उत्पादन, बिक्री अथवा वितरण को भी प्रतिबंधित कर दिया है.
 
नई दिल्ली: भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या द्वारा भारत छोड़ने से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से अपनी मुलाकात का दावा करने के बाद विपक्षी पार्टियों ने मोदी सरकार को आड़े हाथ लिया. हालांकि, जेटली ने माल्या के बयान को ‘तथ्यात्मक तौर पर गलत’ करार दिया. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को माल्या के ‘अत्यंत गंभीर आरोपों’ की स्वतंत्र जांच के आदेश तुरंत देने चाहिए और जेटली को जांच जारी रहने के दौरान अपना पद छोड़ देना चाहिए. वहीं इस बीच कांग्रेस सांसद पीएल पुनिया ने कहा है कि उन्‍होंने वित्‍त मंत्री अरुण जेटली और विजय माल्‍या को संसद के सेंट्रल हॉल में एक-दूसरे से बातचीत करते हुए देखा था. उन्‍होंने कहा कि यह बात उस दिन की सी

सीटीवी फुटेज देखने के बाद साबित हो सकती है.
वहीं बीजेपी के पूर्व नेता एवं पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि न सिर्फ वित्त मंत्री जेटली बल्कि पूरे भाजपा नेतृत्व को माल्या से अपने संबंधों पर बेदाग सामने आना चाहिए. कांग्रेस नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, ‘माल्या ने दो चीजें कही हैं.पहली कि उसने वित्त मंत्री से व्यवस्थित ढंग से मुलाकात की थी और दूसरी यह कि उसने मामले को सुलझाने की पेशकश की थी.इस मामले का पूरा खुलासा होना चाहिए.व्यापक स्पष्टीकरण आना चाहिए और व्यापक जांच होनी चाहिए.’ उन्होंने सवाल किया, ‘जब बैंकों को मालूम था, वित्त मंत्रालय को मालूम था, पूरी सरकार को मालूम था और माननीय प्रधानमंत्री को मालूम था कि माल्या पर इतना बड़ा कर्ज बकाया है.ऐसे में उसे देश से बाहर क्यों जाने दिया गया.यह बुनियादी सवाल है जिसका उत्तर पूरा देश जानना चाहता है.’
माकपा के महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि माल्या के भारत से भागने के वाकये ने एक बार फिर इस बात की पुष्टि कर दी कि मोदी सरकार ‘बड़े डिफॉल्टरों को जनता के पैसे लूट कर भागने देती है.असल मुद्दा यह है कि लुकआउट नोटिसों के बाद भी वह कैसे भाग गया?’ आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने माल्या की ओर से किए गए खुलासे को ‘बिल्कुल चौंकाने वाला’ करार दिया और सवाल किया, ‘वित्त मंत्री ने अब तक इस सूचना को छुपाए क्यों रखा?’ केजरीवाल ने ट्वीट किया, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, नीरव मोदी के देश छोड़कर जाने से पहले उससे मिलते हैं.विजय माल्या के देश छोड़कर जाने से पहले वित्त मंत्री उससे मिलते हैं.इन बैठकों में क्या पकाया जा रहा था? जनता यह जानना चाहती है.'

Monday, September 10, 2018

के बाद से मोदी दो बार श्रीलंका जा चुके हैं.

रीलंका ने अपना हम्बनटोटा पोर्ट चीन को सौंप दिया. हालांकि ज़्यादातर चीनी प्रोजेक्ट महिंदा राजपक्षे के काल में ही शुरू हुए थे. राजपक्षे की पार्टी श्रीलंका में अब भी लोकप्रिय है. हाल ही में राजपक्षे की पार्टी को स्थानीय चुनावों में जीत मिली है.
2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद से मोदी दो बार श्रीलंका जा चुके हैं. जब हम्बनटोटा पोर्ट को श्रीलंका ने चीन को सौंपा तो मोदी सरकार की आलोचना हुई थी कि वो श्रीलंका में चीन के प्रभाव को रोकने में नाकाम रही.
नेपाल के साथ भी मोदी के चार साल के शासनकाल में संबंध ख़राब हुए हैं. 2015 में भारत की अनौपचारिक नाकेबंदी के कारण नेपाल ज़रूरी सामानों की किल्लत से लंबे समय तक जूझता रहा.
यह नाकेबंदी नेपाल के नए संविधान पर मधेसियों की आपत्ति के कारण थी. नेपाल में मधेसियों की जड़ें भारतीय राज्य उत्तर प्रदेश और बिहार से जुड़ी हैं. इस दौरान नेपाल की राजनीति में भारत के ख़िलाफ़ एक किस्म का ग़ुस्सा पनपा और चीन से सहानुभूति पैदा हुई.
भारत ने नेपाल के संविधान में बिना किसी संशोधन के ही नाकेबंदी ख़त्म की, लेकिन तब तक हालात हाथ से निकल गए थे. 2018 में खड़ग प्रसाद ओली फिर से पीएम बने तो उन्होंने चीन के साथ कई समझौते किए.
नेपाल चीन की महत्वाकांक्षी योजना वन बेल्ट वन रोड में भी शामिल हो गया. सार्क देशों में भूटान को छोड़ सभी देश चीन की इस परियोजना में शामिल हो गए हैं. यह भारत के लिए तगड़ा झटका माना जा रहा है.
इसी तरह अफ़ग़ानिस्तान में भी तालिबान हार नहीं रहा. कहा जा रहा है कि अंततः तालिबान और पाकिस्तान के समझौते से ही कोई रास्ता निकलेगा. अफ़गानिस्तान की सत्ता में तालिबान का प्रभाव बढ़ेगा तो बदले हालात में वो भारत के बजाय पाकिस्तान को ही तवज्जो देगा.
ईरान के साथ भारत के अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन भारत यहां भी अमरीका को समझाने में नाकाम रहा कि वो ईरान से तेल आयात करेगा. ईरान में भारत चाबहार पोर्ट विकसित करना चाह रहा है. लेकिन इसके लिए भारत को अमरीका के प्रभाव से मुक्त होना होगा.
बांग्लादेश में इसी साल दक्षिणी और उत्तरी बांग्लादेश को जोड़ने वाला पुल बनकर तैयार हो जाएगा. इस पुल को चीन बना रहा है. छह किलोमीटर लंबा यह पुल दोनों इलाक़ों को सड़क और रेल के ज़रिए जोड़ेगा. बांग्लादेश बनने के बाद से यह इंजीनियरिंग की सबसे चुनौतीपूर्ण परियोजना थी जो बनकर तैयार होने वाली है.
यह सेतु पद्मा नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक है. फ़ाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार इस पुल के निर्माण में चीन ने 3.7 अरब डॉलर की रक़म लगाई है. चीन ने इसमें न केवल पैसा दिया है बल्कि इंजीनियरिंग में भी मदद की है.
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने भी बांग्लादेश में इस पुल को लेकर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है और कहा है कि दोनों देशों के बीच बढ़ती दोस्ती का यह नया प्रतिमान है.
भारत को उस वक़्त और तगड़ा झटका लगा था जब बांग्लादेश ने ढाका स्टॉक एक्सचेंज के 25 फ़ीसदी हिस्से को शंघाई और शेनज़ेन स्टॉक एक्सचेंज को 11 करोड़ 90 लाख डॉलर में बेच दिया जबकि भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) को नहीं दिया था.
एनएसई के अधिकारी ढाका भी गए थे ताकि चीन को रोक सकें, लेकिन इसमें नाकामी ही हाथ लगी थी. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने ये भी तर्क दिया था कि चीन इस इलाक़े में राजनीतिक ताक़त का इस्तेमाल कर रहा है.
आख़िर भारत को इतने झटके क्यों लग रहे हैं? पवन वर्मा कहते हैं, ''वर्तमान सरकार की विदेशी नीति में एक रणनीतिक अभाव है. हम एडहॉक पॉलिसी पर चल रहे हैं. हम रिएक्टिव हैं जबकि हमें प्रोएक्टिव होना चाहिए था. पाकिस्तान के साथ तो एक रणनीतिक सोच का ख़ास अभाव है. चीन का जिस तरह से प्रभाव बढ़ रहा है उससे साफ़ है कि कूटनीतिक असफलता हम झेल रहे हैं. चाणक्य के देश में कूटनीति बिना रणनीति के चल रही है. मालदीव में इतना कुछ अचानक तो नहीं हुआ. हर चीज़ की पृष्ठभूमि पहले से तैयार होती है, लेकिन भारत कर क्या रहा था. मालदीव से हमारा प्रभाव बिल्कुल ख़त्म हो गया है.''
पवन वर्मा कहते हैं, ''कूटनीतिक पहलू पर भारत के सेना प्रमुख का भी बयान आता है. सरकार में कहीं न कहीं व्यवस्थागत ख़ामियां हैं. रणनीति बनाने में विदेश मंत्रालय को आप दरकिनार नहीं कर सकते. विदेश मंत्रालय की उपेक्षा की जा रही है. मुझे क्या, इस बात का एहसास सुषमा स्वराज को भी है कि उनके मंत्रालय की उपेक्षा हो रही है. वर्तमान सरकार की विदेश नीति में रणनीति और दूरदर्शिता का अभाव है.''

Tuesday, September 4, 2018

河北政绩考核取消“人均GDP及增长率”指标

官员考核政绩先看GDP,这一直被认为是环境保护斗不过污染企业的根源。近日,中国河北省率先取消了政绩考核体系中“人均 及增长率”这一指标。
      据《中国环境报嘉宾作者诺林·海德尔,驻巴基斯坦记者、教育工作者。
在64年以前的世界地图上,印度和巴基斯坦就作为两个独立的国家而现实存在着。然而,还存在着另一种现实,从远古时代开始,也就是在地图和国界线出现以前,这块土地就已经存在着那些山川河流、花草树木、各种生灵。无论地理和政治如何划分,都没法将土地和自然资源完全分开。
印度和巴基斯坦可以说是两个独立的国家,但是,他们却共享着绵延几千公里的国境线。事实上,他们之间没有像山脉、海洋或者河流这样的物理性阻隔。相反,河流使得这两个邻国之间的联系亘古弥长。
河流相比其他物理特征更能说明“自然无国界”这一观点。河流是文明的生命线,是文化、歌曲、音乐、舞蹈、饮食、服饰和诗歌的守护者。河流如同城市永恒的监护人,细心培养,令其成长。河流是知识发展、进步、寻求的象征。在印度和巴基斯坦的背景下,即使一条河也会产生一道分割线。但所有的河流,无论从东旁遮普流到西旁遮普还是来自北方支流,最终都会汇入印度河,并继续他们最后的里程,直到阿拉伯海。
印度和巴基斯坦一直进行着河流的争夺。虽然《印度河流域用水公约》已经约定共享这一条河流,但是争吵却一直没有停止过。这其中是存在着许多政治和战略上的因素。虽然现在已经建立了水资源管理委员会,并且每年都有高水平代表团进行频繁的意见交流,但是双方似乎都对河水的分配问题不甚满意。
这种争论缘来已久,所以没有必要再重复,但是二者争论的底线是相同的:即,每个国家都想为了自己的既得利益,为了自己的人民以及政治战略而获取最大的效益。但似乎没有人在这场利益的角逐中思考过河流的权利。这些河流的历史,远远长于在这里生存的人类、国家、政府甚至政治,它们对这片土地拥有最古老的权属。
在印巴区域气候变化与灾难的风险控制大会上,这个主题被重新提出。该会议7月在巴基斯坦的拉合尔召开,这是一场很重要的大会,它为学者提供了一个讨论众多跨国界合作问题的平台,如气候变化、水资源共享以及河流和灾难管理。会议由社会市场中心的行政长官马里尼·梅赫拉主办,并召集了来自印度、巴基斯坦和世界各地的学者,会议不仅详细讨论了不同维度区域合作问题,还为巴基斯坦青年学者获得合作重要性的第一手知识。
无论在某些问题上的政治分歧有多大,在地区性重要事件(如印巴之间的减灾、河流水资源共享以及降低风险)上的合作以及折衷的协议总会出现。
会议的另一个目标则是,在印度旁遮普邦和巴基斯坦旁遮普邦之间更多邦际的合作中,巴基斯坦应迈出第一步。因为旁遮普区域在不久之前还是同一片土地,两岸的领土、河流和文化还没有出现太大的差异。
影响旁遮普人民的自然现象实际上也影响着双方,所以两国之间还有很多合作空间。印度政府(GOI)灾害管理局前成员梅农教授通过网络电话参加了此次会议,并提供了一些十分吸引人的实例,关于印度正在使用——并且还可改善的——灾害预警技术方法。他解释了印度是如何对淹没水位作出准确预测,从而拯救不可计数的人命和牲畜。使用相同的技术,再加入巴基斯坦的数据,就可以做出更好、更准确的涨潮预测。
宪法第十八修正案的通过使巴基斯坦第一次把完整的省级自治权给予联邦单位,现在对于像气候变化和降低灾害风险这些可以从更区域性角度解决的问题就有了更广阔的空间。
在最近省级自治权成立之后,为这些行政省打开第二扇机会之门的则是对学校课程发展的控制。因此,更多的地方特色课程很有可能被开发,特别是在地理和科学学科中,内容包括对灾害、降低灾害风险、灾害准备以及学校安全计划的概念。
在这一方面,印度遥遥领先,而巴基斯坦还有很多关于降低灾害风险和气候变化的儿童专用材料的准备工作要做。巴基斯坦旁遮普邦可以从一些已经完成的工作中受益。
我认为现在正是捍卫河流的时候了。我为这些河流呐喊,也为我家乡的拉维河呐喊。由于水域划分,拉维河已经不再流动,成为一潭死水。曾经奔腾不息的河流如今奄奄一息。我请求印度和印度的儿女对拉维河再仁爱一些,不要管条约上写了什么,让拉维河再次流淌、再次活跃。不论这河水如同恒河和印度河般湍急,还是如同拉维河和萨特莱杰河般平缓,河水是我们共同的资源、我们共同的遗产。
不要让河水成为我们之间差异的受害者。未来的唯一希望就在于对和平的合作与承诺。地图上的界线不可或缺,但是河流所代表的界线更为重要:那是地球母亲的生命线。
此博客由刘耕源、胡洁萍翻译。
》8月15日报道,近日,河北省委、省政府干部考核工作领导小组发出通知,对设区市党政领导班子和主要领导干部工作实绩综合考核评价实施办法中的定量指标进行调整,“人均GDP及增长率”首次从政绩考核体系中消失。
      原有19项指标减掉两项,新增7项,调整后考核指标为24项。新增7项指标中,有3项为节能减排指标,为“单位GDP二氧化碳排放量降低率”一项和“氨氮排放量削减率”、“氮氧化物排放量削减率”两个子项的指标。
      负责此次干部考核定量指标调整工作的河北省委组织部官员介绍,减掉的两项内容为“人均GDP及增长率”、“城镇固定资产投资及增长率”,增加的7项内容为重点项目建设、工业聚集区发展、单位GDP二氧化碳排放量降低率、保障性安居工程建设、食品综合抽检合格率、基本医疗保险参保率、群众安全感及提高幅度。
      该报道称,此举“宣告了‘ ’以单独身份出现在河北省干部考核指标体系中的时代的结束”——新考核体系中, 仍以参照数据出现。“人均地方财政收入及增长率”改为“财政收入占GDP比重”。此外,在整个考核指标体系中,GDP还有两次出现,均在资源环境类的能耗降低指标里,一个是“单位GDP能耗降低率”,另一个是“单位GDP二氧化碳排放量降低率”。
      新的指标增设了重点项目建设和工业聚集区发展指标。工业聚集区发展指标主要包括“工业聚集区企业主营业务收入及增长率”、“工业聚集区固定资产投资及增长率”、“工业聚集区省外资金到位额及增长率”3项指标。
      河北省是工业大省,对能源资源依赖性强。此举将对其工业污染的限制和节能减排发挥多大作用?有待时间检验。
      中国经济以环境资源为代价发展,令民间普遍认为政绩考核“以GDP论英雄”早该改革。中国曾探索“绿色GDP”核算方法,但仅于2006年发布过唯一一次《中国绿色国民经济核算研究报告2004》,此后便搁浅。

Thursday, August 30, 2018

सईद अंसारी सईद अंसारी भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय एंकर्स में से

एक हैं. सईद को लाइव एंकरिंग में दक्षता हासिल है. सईद उन गिने-चुने एंकर्स में से हैं जो राजनीति, खेल, व्यापार सभी तरह की खबरों को बेहद प्रभावशाली ढंग से पेश करते हैं.

सईद बेहद शालीनता सौम्यता और गंभीरता के साथ खबरों को प्रस्तुत करते हैं. टीवी खबरों में सईद को उनकी खूबसूरत आवाज से भी खूब पहचान मिली है. सईद का शुमार इंडस्ट्री के पढ़े-लिखे एंकर्स में होता है. खबरों की संवेदनशीलता को लेकर सईद की गंभीरता दर्शकों को खबर से जोड़ती है. वहीं एक जुझारू पत्रकार के तौर पर भी इनकी पहचान है. फील्ड रिपोर्टिंग हो या एंकरिंग या फिर डेस्क वर्क, हर जगह इन्होंने अपना परचम लहराया है.
सईद आजतक के सबसे महत्वपूर्ण प्राइम टाइम शो ''10तक'' और ''विशेष'' के होस्ट हैं. सईद सुबह से लेकर रात तक लगातार आजतक के विभिन्न कार्यक्रमों की एंकरिंग करते हैं. सईद इकलौते ऐसे एंकर हैं जो हर शो में फिट बैठते हैं. चाहे वो सुबह-सुबह के शो हों या रात का 10तक. देश की हर बड़ी खबर पर सईद रिपोर्टिंग करते हैं. विभिन्न राज्यों में चुनाव को कवर करते सईद की उपस्थिति आजतक पर हमेशा रहती है. मुंबई में जोरदार बारिश हो, बीएमसी के चुनाव हों या बिहार की बाढ़ सईद हर जगह अपनी संवेदनशील रिपोर्टिंग से दर्शकों पर छाप छोड़ते हैं. नेताओं को कठघरे में खड़ा कर कड़े सवाल पूछने वाले कार्यक्रम ''थर्ड डिग्री'' में भी सईद दिखाई देते हैं.
सईद सोशल मीडिया के किसी भी प्लेटफार्म पर मौजूद नहीं हैं और न ही इन्हें सोशल मीडिया पर अपनी उपस्थिति पसंद है. सोशल मीडिया और ग्लैमर से दूर रहने वाले सईद को पुरस्कार लेने में भी संकोच होता है. हालांकि सईद अंसारी को देशभर की कई संस्थाओं ने प्रतिष्ठित सम्मान और पुरस्कार प्रदान किए हैं. सईद को ENBA का सर्वश्रेष्ठ एंकर अवॉर्ड, BCS रत्न बेस्ट एंकर अवॉर्ड, नारद पुरस्कार जैसे तमाम अवॉर्ड मिल चुके हैं. सईद के नाम एक ऐसा कारनामा भी है जो आजतक कोई भी एंकर नहीं कर पाया. सईद ने लगातार 18 घंटे बिना ब्रेक के लाइव एंकरिंग कर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है, जिसे लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है. 
सईद अंसारी रेडियो जॉकी रहे हैं, उन्होंने सैकड़ों डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाईं. लिखने-पढ़ने के शौकीन सईद साहित्य प्रेमी हैं. इंडिया टुडे पत्रिका और देश के विभिन्न समाचार पत्र-पत्रिकाओं में सईद के लेख छपते रहते हैं. सईद की विशेषता पुस्तक समीक्षा करना है. कई सौ पुस्तकों की सईद अंसारी समीक्षा कर चुके हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है. देशभर के विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थाओं, विभिन्न सामाजिक सांस्कृतिक संस्थाओं द्वारा सईद अंसारी को मीडिया विशेषज्ञ और वक्ता के रूप में आमंत्रित किया जाता है.
सईद ने मास कम्यूनिकेशन में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के अलावा पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है. सईद ने मास मीडिया और क्रिएटिव राइटिंग में भी दो साल का डिप्लोमा किया है.नाक्षी कंडवाल टेलिविजन मीडिया की युवा पीढ़ी के सबसे प्रॉमिसिंग न्यूज एंकर्स में से एक हैं. मीनाक्षी देश की पहली ऐसी न्यूज एंकर हैं जिन्होंने स्टार न्यूज का बहुचर्चित टैलेंट हंट जीतकर टीवी न्यूज की दुनिया में इतिहास रचा. 2010 में "स्टार एंकर हंट" जीतकर मीनाक्षी ने स्टार न्यूज से एंकरिंग करियर की शुरुआत की. फिर इंडिया टीवी और 2015 में आजतक ज्वाइन किया.

आजतक के मार्निंग प्राइम टाइम "आज-सुबह" और "एक और एक ग्यारह" को मीनाक्षी एंकर करती हैं. इसके अलावा हर शनिवार-रविवार वीकेंड शो 'वायरल टेस्ट' भी मीनाक्षी होस्ट करती हैं. एंकरिंग का सौम्य लहजा, सुलझा व्यक्तित्व, मुद्दों की समझ, कुछ अलग करने का जुनून और अपनी मुस्कुराहट को खबरों में ना खोने देना मीनाक्षी को बाकी एंकर्स की लीग से अलग करता है.
आजतक के लिए यूपी चुनाव, नोटबंदी के दौरान उत्तराखंड के गांवों से आपकी ग्राउंड रिपोर्ट और अभिनेत्री श्रीदेवी के निधन पर तीन दिन का नॉनस्टॉप कवरेज काफी चर्चित रहा. हर साल होने वाले आजतक के सालाना इवेंट 'साहित्य आजतक', 'एजेंडा-आजतक' और 'पंचायत-आजतक' में मीनाक्षी के मंच संचालन से लेकर इंटरव्यूज को काफी सराहा गया.
मीनाक्षी दिल्ली में ही पैदा हुईं और पली-बढ़ीं लेकिन मूल रुप से उत्तराखंड से जुड़ी हैं. हर पहाड़ी की तरह अक्सर पहाड़ पर ही लौट जाने और बसने की ख्वाहिश रखती हैं. पहाड़ की संस्कृति, मुद्दों और प्राकृतिक संसाधनों के लिए उनका लगाव अक्सर उनके सोशल मीडिया प्रोफाइल्स में दिखता है. दिल्ली यूनिवर्सिटी के विवेकानंद कॉलेज से कॉमर्स ग्रेजुएट मीनाक्षी ने मॉस कम्युनिकेशन में एमए भी किया है.मीनाक्षी की लिखने-पढ़ने और सिनेमा देखने में काफी दिलचस्पी है. अगर मीडिया ज्वाइन ना किया होता तो शायद किसी ट्रैवल ब्लॉगर, स्टोरी टेलर या मोटिवेशनल स्पीकर के तौर पर मीनाक्षी दिखाई दे सकती थीं.

深圳佳士工人维权发酵:多名声援团成员失联

中国深圳佳士维权事件近日升级。周五凌晨(8月24日),身着防暴装备的警察冲入工人声援团成员住处。目前许多声援团成员仍处于失联状态。

根据英国《卫报》报道,警察突袭声援团所在公寓后,有50名参与声援团的学生失联。路透社称,该住所住着40名学生和支持组建工会的人士。
《卫报》还引述曾与该声援团接触过的劳工活动人士称,冲突发生在周五凌晨5点的广东省惠州市。
网上流传的视频和照片显示,一群戴着头盔手持盾牌的警察冲入房间内与房内人员发生冲突,有人大喊“手拉手,手拉手...”
路透社引述一位提供突袭视频的活动人士称,视频是公寓内的学生在警察进入时发出的。
BBC中文尝试通过电话、通讯软件联系声援团核心成员岳昕及另外两名成员,都没有回应。深圳和惠州警方也未回应事件。
此次维权事件发生在中国广东省深圳市佳士科技工厂。工厂工人指公司存在超时加班、严苛罚款、欠缴公积金等违法行为,希望通过组建工会来维护自己的权益。今年5月,数名佳士工人开始筹备组建工会,但随后有积极组建工会的工人代表遭到不明身份人士殴打,也有涉事工人被开除。
7月27日事件进一步发酵,一些佳士工人及其支持者前往工厂要求复工,但遭到警方逮捕。目前仍有14名工人遭警方拘留,工人声援团核心成员沈梦雨也在8月11日失联。
这次维权事件得到各地高校以及学者的声援。北京大学、中国人民大学等十余所高校的学生发出声援书。香港大学社会学系教授潘毅、香港中文大学新闻与传播学院教授邱林川等百余名全球学者联署,呼吁释放被捕人士,支持工人自主筹建工会。
周五凌晨警方突袭前,工人现场声援团成员一直在增加,截至8月21日,声援团已有50多人。他们主要在广东省惠州市大亚湾附近活动,给周边居民和工人宣讲、发资料。但是不少学生已经受到了来自中国政府的压力。
路透社引述几名学生称,中国当局将一些学生的父母接到广东,让他们在宾馆接受“如何培养小孩”的培训。当局还安排这些家长出现在学生抗议的地方。
在多名声援团成员失联当日,此前对该事件一直保持沉默的中国媒体对这次事件进行了详细报道。
中国新华社和《南方都市报》在警察清场当天深夜发表文章称,7月下旬,一些佳士工厂前员工多次在佳士公司门口聚集、围堵,甚至闯进工厂车间,逼停生产。他们与家属和工友还到深圳当地派出所阻挠正常办公。
文章形容工人为“维权”多次“非法”冲击佳士公司。新华社引述参与事件的余某聪称,他们的诉求并不是标语上的“成立工会”、“增加福利”,“我们最终的诉求还是想得到一定的经济补偿”。《南方都市报》还报道,此次事件中,微信群“打工者中心群”是主要酝酿和传播渠道之一,“打工者中心”是一个未在国内获批的非政府组织,全部开支来自境外非政府组织“劳动力”资助。
值得注意的是,新华社与《南方都市报》的报道都未详细描述高校学生的参与过程,也未披露声援工人的学生是否已经被警方带走。新华社只是简单提及,“这起普通的工人‘维权’事件,通过互联网特别是境外网站持续发酵,不少工人、学生、网民被裹挟其中”。
本次声援团成员中有很大一部分是左翼青年。他们大多年龄在二三十岁,岳昕和沈梦雨就是两名“90后”。岳昕说,不少参与者是马克思主义者,他们希望维护工人阶级的利益。
他们的行动得到了中国左派人士的支持。《南华早报》早前报道,8月6日中午,声援团在深圳坪山燕子岭派出所附近举行了集会,其中40多名共产党员和退休干部到场参加,他们都来自左翼网站“乌有之乡”。
现场图片显示,这些共产党员和退休干部大多是白发苍苍的老人,举着毛泽东的画像和横幅,横幅上写着“湖北 江西老工人 老党员 老干部支持被抓捕的佳士工人及其声援者”。
有观点指,目前佳士事件已经由劳工运动转化为由毛左主导的街头政治活动。但香港大学社会学系教授潘毅对 中文表示,此次行动由工人自发,随后得到高校学生和国内的一些左派人士的支援,并不是由国内左派人士主导。